एक अच्छे वक्ता के गुण

एक अच्छे वक्ता के गुण

एक अच्छा वक्ता होना एक कला है | इस कला में निपुण होने के लिए व्यक्ति का सामाजिक होना अतिआवश्यक है | मानवीय विचारों से पूर्ण मानव ही एक अच्छा वक्ता हो सकता है | एक व्यक्ति को अच्छा वक्ता होने के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वह दूसरों के विचारों को, वक्तव्यों को सुने | उनसे सुनकर वह अपने अपने वक्तव्य को विभिन्न आयामों से परिपक्व कर सकता है | अच्छे वक्ता को क्षेत्रीय भाषा के साथ – साथ अपने देश की राजभाषा में महारत हासिल करनी चाहिए ताकि भारी भीड़ में भी वह अपनी एक विशेष छाप लोगों के दिलों पर छोड़ सके | एक अच्छा वक्ता होने के लिए ड्रेसिंग सेंस अतिमहत्वपूर्ण है अर्थात जिस प्रकार का कार्यक्र हो उसके अनुरूप ही आपको कपड़े पहनने चाहिए | अच्छा लुक आपके व्यक्तित्व पर चार चंद लगा सकता है | एक अच्छा वक्ता होने के लिए अच्छा श्रोता होना अतिआवश्यक है | हमारे देश में बहुत से ऐसे नेता, दार्शनिक, शिक्षाविद व चिन्तक हुए हैं जिनको हम तो क्या बाहरी देशों के लोग भी आज भी सुनना पसंद करते हैं | चाहे वह किसी भी रूप में उपलब्ध हो video या फिर अन्य किसी रूप में | इनमे विशेष रूप से महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु, लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गाँधी, अन्ना हजारे, सुभाषचंद्र बोस , अटलबिहारी बाजपेयी, अमर्त्य सेन, विवेकानंद जैसे और भी बहुत से नेता, चिन्तक हुए हैं जिनके विचारों को लोग आज भी सुनना चाहते हैं | इनमे से कुछ हमारे बीच आज भी मौजूद हैं और देश की युवा पीढ़ी का दिशा निर्देशन कर रहे हैं | एक अच्छे वक्ता को अलंकृत भाषा के साथ – साथ साहित्यिक शब्दों का ज्ञान भी होना चाहिए | वक्तव्य को प्रस्तुत करने की भिन्न – भिन्न शैलियों का ज्ञान होना चाहिए | एक अच्छा वक्ता स्वयं को अलग – अलग अवसरों पर दिए जाने वाले वक्तव्य के लिए तैयार रखता है एक अच्छा वक्तव्य श्रोता के मन पर अमित छाप छोड़ता है | और वह श्रोता ऐसे वक्तव्य बार – बार सुनने के लिए प्रेरित करता है | एक अच्छे वक्ता में मुख्यतय निम्नलिखित गुणों का समावेश होना अतिआवश्यक है :-

  1. वक्तव्य को दैनिक जीवन के साथ जोड़कर पेश करने की क्षमता होनी चाहिए |
  2. वक्तव्य को समसामयिक घटनाओं और समाचारों से जोड़कर सन्दर्भ के रूप में पेश करना चाहिए |
  3. वक्तव्य रोचक हो इस बात का पूरा – पूरा ध्यान रखा जाए |
  4. वक्तव्य को आरम्भ करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि वह आरम्भ में ही श्रोता को अपनी ओर आकर्षित कर सके |
  5. वक्तव्य के दौरान श्रोता को इस बात का एहसास कराते रहना चाहिए कि उसकी उपस्थिति बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है |
  6. वक्तव्य के आरम्भ में कार्यक्रम में उपस्थित माननीय सदस्यों को कुछ विशेष शब्दों के द्वारा संबोधित करना चाहिए जैसे श्रद्धेय/ परम श्रद्धेय / आदरणीय/ आदर के योग्य / परम आदरणीय / सम्माननीय/ पूज्य/ सम्माननीय व्यक्तित्व इत्यादि – इत्यादि |
  7. कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि वक्तव्य में विषय से हटकर कोई बात शामिल न हो जो आपको आपके विषय से भटका दे |
  8. वक्तव्य में पूर्णता लाने की कोशिश की जानी चाहिए | इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई आवश्यक बात या जानकारी छूट न जाए | वक्तव्य निष्कर्ष देने वाला होना चाहिए |
  9. वक्तव्य को तथ्य एवं विषय पर आधारित करने का पूरा – पूरा प्रयास किया जाना चाहिए |
  10. वक्तव्य में आवश्यक हो तो आंकड़े भी शामिल किये जा सकते हैं |
  11. वक्तव्य को दिल से एवं हो सके तो मस्तिस्क का पूर्ण उपयोग कर पेश करना चाहिए |
  12. वक्तव्य देने से पूर्व पक्की तैयारी कर लेनी चाहिए ताकि वक्तव्य पेश करने के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो |
  13. हो सके तो वक्तव्य के दौरान संस्मरण, किसी विशेष व्यक्तित्व के जीवन से जुड़े संस्मरण, कोई महत्वपूर्ण घटना, कविता, शेर आदि का इस्तेमाल भी वक्तव्य को रोचक बनाने के लिए किया जा सकता है |
  14. मुहावरों एवं सूक्तियों का भी बेहतर इस्तेमाल वक्तव्य के दौरान किया जा सकता है |
  15. वक्तव्य में सजीवता लाने का पूरा – पूरा प्रयास किया जाना चाहिए |
  16. वक्तव्य में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि वक्तव्य का प्रस्तुतीकरण सरल, स्पष्ट एवं क्रमबद्ध हो और विचारों को आपस में एक – दूसरे के साथ जोड़कर पेश किया जाना चाहिए |
  17. आवश्यकता से अधिक शेर या कविता का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए |
  18. वक्तव्य के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाए कि विचारों की प्रस्तुति के दौरान आवश्यक नियमों का पालन हो जैसे जगह – जगह पर आरोह – अवरोह का ध्यान रखा जाए | विचारों को जोश के साथ पेश किया जाए | वक्तव्य के अंत में भी आपके भीतर जोश बना रहे और श्रोता आपकी ओर खिंचे रहें इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए |
  19. वक्तव्य को पूरे जोश और उत्साह के साथ पेश किया जाना चाहिए | वक्तव्य के दौरान किसी भी प्रकार की थकान महसूस न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए |
  20. वक्तव्य को श्रोता के स्तर के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए ताकि वह श्रोता की पहुँच के भीतर हो |
  21. एक अच्छे वक्तव्य में लोकोक्तियों का भी बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है |
  22. वक्तव्य के अंत में श्रोताओं का आपकी बात ध्यान से सुनने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया जाना चाहिए |
  23. देश के बाहर यदि आप वक्तव्य दे रहे हों तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वक्तव्य के आरम्भ में उस देश की संस्कृति के प्रति अपने लगाव को उस देश की भाषा से वक्तव्य आरम्भ कर प्रदर्शित करें |
  24. समसामयिक शब्दावली का प्रयोग करें |
  25. शब्दों का चयन श्रोताओं की आवश्यकता के अनुरूप करें | अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ कि उपरोक्त सभी गुणों में से कुछ ख़ास विशेष को हम यदि अपने वक्तव्य शैली का हिस्सा बना लें तो हम अपने आपको एक श्रेष्ठ वक्ता के रूप में समाज का हिस्सा बना सकते हैं |

अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

   12
10 Comments

Mohammed urooj khan

16-Apr-2024 12:02 AM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

Reply

शुक्रिया जी

Reply

kashish

11-Apr-2024 09:03 AM

Awesome

Reply

आपका आभार जी

Reply

Varsha_Upadhyay

10-Apr-2024 11:36 PM

Nice

Reply

आपका आभार जी

Reply